रायगढ़।छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से मानव और वन्यजीव सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी देने वाला मामला सामने आया है। पूंजीपथरा थाना क्षेत्र के जिवरी गांव के जंगल में शनिवार सुबह ग्रामीणों ने एक महिला की सड़ी-गली लाश देखी तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर पहुँची पुलिस जांच में पता चला कि महिला की मौत शिकारियों द्वारा जंगली सूअर के लिए बिछाए गए करेंट के जाल में फंसने से हुई है।
करेंट जाल ने ली महिला की जान
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह जिवरी गांव के कुछ ग्रामीण लकड़ी लेने जंगल गए थे। तभी झाड़ियों के बीच से बदबू आने पर उन्होंने आसपास तलाश की, तो एक महिला का शव दिखाई दिया।
सूचना मिलते ही पूंजीपथरा थाना प्रभारी टीम के साथ मौके पर पहुँचे और घटनास्थल की बारीकी से जांच की। मृतका की पहचान घासनिन मांझी पति सुनऊ राम (उम्र 41 वर्ष, निवासी जिवरी) के रूप में की गई है।
बताया गया कि मृतका दो दिन पहले से लापता थी और उसके परिजनों ने थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लगातार खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला था। जांच में स्पष्ट हुआ कि जंगल में कुछ अज्ञात शिकारियों ने जंगली सूअर के शिकार के लिए बिजली के तार से करेंट बिछाया था, जिसमें फंसने से महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने घटनास्थल से तार और शिकार सामग्री जब्त कर ली है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मर्ग कायम कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
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वन विभाग की लापरवाही उजागर
यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि वन विभाग आखिर कब जागेगा?
जिले के जंगलों में करेंट बिछाकर शिकार करने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन वन विभाग के अधिकारी न तो सक्रिय दिखते हैं और न ही गश्त बढ़ाई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, “वन विभाग के अधिकारियों को कई बार अवैध शिकारियों की गतिविधियों की सूचना दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”
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ऐसे हादसे पहले भी हो चुके हैं
रायगढ़, धरमजयगढ़ और लैलूंगा इलाकों में इससे पहले भी बिजली के करेंट से हाथियों और ग्रामीणों की मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं।
जून 2024 में धरमजयगढ़ रेंज के बरगांव जंगल में बिजली के तार की चपेट में आने से एक हाथी की मौत हो गई थी।
सितंबर 2023 में लैलूंगा वन परिक्षेत्र में अवैध शिकार के लिए बिछाए गए तार से एक किसान की जान चली गई थी।
वहीं, घरघोड़ा के पास धेनुकी जंगल में दो हाथियों की करेंट से मौत की घटना ने उस समय पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।
इन घटनाओं के बावजूद वन विभाग द्वारा न तो सख्त निगरानी की गई और न ही अपराधियों पर ठोस कार्रवाई हुई।
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गांवों में भय और असुरक्षा का माहौल
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में बिछाए गए बिजली के तार अब मानव जीवन के लिए भी खतरा बन चुके हैं।
घासनिन मांझी की मौत के बाद आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अवैध शिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और वन विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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प्रशासन के लिए चेतावनी
यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि एक प्रशासनिक विफलता का उदाहरण है।
जब जंगलों में खुलेआम करेंट बिछाकर शिकार किया जा रहा है और वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगती, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम और विद्युत सुरक्षा कानून सिर्फ कागजों में ही क्यों सिमट कर रह गए हैं?
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