लैलूंगा/ लैलूंगा के किसानों की किस्मत पर मानो हाथियों का कहर स्थायी हो गया है। वन परिक्षेत्र लैलूंगा के बगुडेगा परिसर में विगत 15 दिनों से लगभग 70 हाथियों का दल जमकर उत्पात मचा रहा है। इस दल ने बगुडेगा, चोरंगा, सिंयारपारा, बैगीनझरिया और कुर्रा के जंगलों व खेतों में भारी नुकसान किया है। किसानों का कहना है कि हाथियों ने करीब 250 एकड़ फसल को पूरी तरह चौपट कर दिया, जिससे ग्रामीण किसान बर्बादी की कगार पर पहुँच गए हैं।
वन विभाग पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर रहा है, जमीनी स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा। हाथियों को भगाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। किसानों का कहना है कि जब भी वे शिकायत लेकर वन विभाग के अधिकारियों तक पहुँचते हैं, तो उन्हें टाल दिया जाता है। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि कई बार वनकर्मी शराब के नशे में मौके पर पहुँचते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।
कई साल से बिना मुआवज़े के पीड़ित किसान
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लैलूंगा क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से हाथी फसल बर्बाद कर रहे हैं, लेकिन आज तक एक भी किसान को मुआवज़ा नहीं दिया गया है। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर शासन-प्रशासन अब भी नहीं चेता तो वे आंदोलन की राह पकड़ेंगे। किसानों में भय और आक्रोश दोनों ही चरम पर है। कई किसान तो डिप्रेशन की स्थिति में पहुँच चुके हैं।
प्रशासन को दी गई चेतावनी
किसानों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व लैलूंगा को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि अगर समय रहते हाथियों को नियंत्रित करने और मुआवज़ा देने की कार्यवाही नहीं की गई, तो वे किसी भी प्रकार की चरम कदम उठाने को मजबूर होंगे। किसानों ने यह भी साफ कर दिया है कि भविष्य में यदि कोई अप्रिय घटना घटती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और वन विभाग की होगी।
जनप्रतिनिधियों तक पहुँचाई गई गुहार
ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा सिर्फ स्थानीय प्रशासन तक ही सीमित नहीं रखी। इस मामले की प्रतियां माननीय सांसद (रायगढ़ लोकसभा), राज्यसभा सांसद, जिला पंचायत सदस्य, धरमजयगढ़ वनमंडल अधिकारी और लैलूंगा उपवनमंडल अधिकारी तक भेजी गई हैं। किसानों की मांग है कि उन्हें फसल नुकसान का मुआवज़ा तुरंत दिया जाए और हाथी भगाने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए।
लैलूंगा फिर बन सकता है बवाल का केंद्र
जानकारों का कहना है कि अगर प्रशासन ने इस बार भी किसानों की उपेक्षा की, तो लैलूंगा क्षेत्र में बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है। हाथियों के लगातार उत्पात से पहले ही किसान बर्बाद हैं, ऊपर से मुआवज़ा न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति रसातल में जा रही है। ऐसे में हालात कभी भी विस्फोटक हो सकते हैं।
ग्रामीणों ने अंत में प्रशासन को एक आखिरी चेतावनी देते हुए कहा –
वनकर्मी शराब पीकर खेत-खलिहानों में न आएं, वरना सारी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।”
अब देखने वाली बात होगी कि शासन-प्रशासन किसानों की इस करारी चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है।
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