जशपुर, सरगुजा, कोरबा, रायगढ़ व बिलासपुर जिले के भोले भाले ग्रामीणों से ठग लिए थे, करोड़ों रुपये
7 सितम्बर 25 को ग्राम चिड़ौरा, थाना कांसाबेल क्षेत्रांतर्गत निवासी 33 वर्षीय प्रार्थिया अमृता बाई ने दिनांक 07.09.25 को थाना पत्थलगांव में रिपोर्ट दर्ज कराया था कि वर्ष 2021 में , आर .पी. ग्रुप नाम की कंपनी,जिसके मुख्य संचालक आरोपी तुरेंद्र कुमार दिव्य उर्फ मनीष कुमार दिव्य एवं राजेंद्र कुमार दिव्य हैं,के द्वारा आरोपी प्रकाश चंद्र धृतलहरे व उपेन्द्र कुमार सारथी के साथ मिलकर, प्रार्थिया को यह बोलकर झांसे में लिया गया, कि कोरबा जिले के मंडवारानी में एक जादुई कलश मिला है , जिसे कि भारत सरकार के द्वारा जादुई कलश को विदेश में बेचा जायेगा, व उसके मुनाफे की राशि को, आर. पी. ग्रुप कंपनी में पैसा जमा करने वाले सदस्यों को अनुदान के रूप में दिया जाएगा, हर सदस्य को 1 से 5 करोड़ रुपए तक मिलेंगे, जिससे आरोपियों के झांसे में आकर प्रार्थिया भी सिक्यूरिटी मनी व प्रोसेसिंग फीस के रूप में 25000 रु जमा कर, उक्त आर.पी. ग्रुप कंपनी से जुड़ गई, आरोपियों के खिलाफ वर्ष 2021 से 2024 तक हजारों लोगों से ठगी करते हुए, करोड़ों रुपए लेकर, रकम वापस न कर उनके साथ धोखाधड़ी किया गया है।
प्रार्थिया की रिपोर्ट पर थाना पत्थलगांव में आरोपियों के विरुद्ध भा. द. वि. की धारा 420,34 के तहत् अपराध पंजीबद्ध कर जांच विवेचना में लिया गया था। मामले की प्रारंभिक विवेचना के दौरान जशपुर पुलिस के द्वारा जब सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों के पीड़ित ग्रामीणों से पूछताछ की गई, तो पता चला कि आरोपियों के द्वारा लगभग 1 करोड़ 94 लाख रु की ठगी की गई थी, जांच के साथ साथ आरोपियों के द्वारा ठगी की रकम की बढ़ने की भी संभावना थी।
चूंकि मामला हजारों ग्रामीणों से करोड़ों की ठगी से संबंधित था, अतः मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, मामले की जांच व आरोपियों की पता साजी हेतु, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर शशि मोहन सिंह के द्वारा,एस डी ओ पी पत्थलगांव धुर्वेश कुमार जायसवाल के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम गठित कर, बिलासपुर, कोरबा एवं सीतापुर भेजी गई थी, जिनके द्वारा कार्यवाही करते हुए, आर. पी. ग्रुप कंपनी के मुख्य संचालक राजेंद्र कुमार दिव्य, तुरेंद्र उर्फ मनीष कुमार दिव्य सहित उनके सहयोगी प्रकाश चंद्र धृतलहरे व उपेन्द्र कुमार सारथी को हिरासत में लेकर वापस लाया गया पुलिस की पूछताछ पर आरोपियों ने बताया कि, उसके एक अन्य साथी जिसका नाम महेंद्र बहादुर सिंह ठाकुर है, के द्वारा उन्हें बताया गया था कि, उसके पास एक कलश है, जो कि काफी महंगे धातु का बना है उसमें जादुई लक्षण हैं, जो चावल को भी खींच लेता है उक्त कलश की विदेशों में कीमत अरबों रुपए में है, उक्त रकम को वह अकेला नहीं ले सकता है कलश की बिक्री से उसे जो भी रकम मिलेगा उसको अन्य लोगों को अनुदान के रूप में देने के लिए उसके द्वारा एक आरपी. ग्रुप नाम की कंपनी बनाई है।
जिसमें की महेंद्र बहादुर सिंह ठाकुर के द्वारा उक्त गिरफ्तार आरोपियों को आर. पी ग्रुप का मुख्य (हेड) बनाया गया और उनके द्वारा अन्य बीस लोगों को ग्रुप में जोड़ते हुए, कंपनी का हेड बनाने हेतु कहा गया था व कलश को बिक्री करने के लिए विदेश के लोगों को बुलाना पड़ेगा, कहकर, उनके आने जाने, रुकने एवं रकम प्राप्ति में जो भी खर्च होगा, उसके लिए कंपनी में जुड़े सदस्यों से रकम इकट्ठा करने हेतु कहा गया।
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