“सम्मान नहीं तो आंदोलन होगा” — लंबित मांगों को लेकर हजारों की आवाज बुलंद, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
लैलूंगा, रायगढ़। वर्षों से अपनी मांगों के निराकरण की आस लगाए बैठे कोटवार आखिरकार सड़कों पर उतर आए। प्रांतीय संघर्ष समिति के आह्वान पर गुरुवार को लैलूंगा विकासखंड के बड़ी संख्या में कोटवारों ने विशाल रैली निकालकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया। नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रैली तहसील कार्यालय पहुंची, जहां मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
ग्रामीण प्रशासन की रीढ़, फिर भी उपेक्षित
प्रदर्शनकारी कोटवारों ने कहा कि वे गांवों में शासन और प्रशासन के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना, राजस्व विभाग के कार्यों में सहयोग देना, कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन की सहायता करना, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य घटनाओं की सूचना देना, निर्वाचन, जनगणना, सर्वेक्षण सहित अनेक शासकीय जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें आज भी सम्मानजनक मानदेय और आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
ये हैं कोटवारों की प्रमुख मांगें
कोटवार संघ ने सरकार से मांग की कि उन्हें नियमित कर शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। साथ ही सम्मानजनक मानदेय, सेवानिवृत्ति पर पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा, दुर्घटना बीमा, जीवन बीमा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान मानदेय बढ़ती महंगाई के दौर में परिवार का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
सरकार पर अनदेखी का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई वर्षों से लगातार ज्ञापन, आवेदन और आंदोलन किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे पूरे प्रदेश के कोटवारों में गहरा असंतोष व्याप्त है। उन्होंने सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर न्याय करने की अपील की।
तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
रैली के बाद कोटवारों का प्रतिनिधिमंडल तहसील कार्यालय पहुंचा, जहां मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया। तहसीलदार ने ज्ञापन शासन तक पहुंचाने और मांगों से संबंधित जानकारी उच्च अधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कोटवारों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रांतीय संघर्ष समिति के निर्देशानुसार आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
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