एमसीएच लैलूंगा में विशेषज्ञ सेवाओं से बढ़ा संस्थागत प्रसव, 574 सुरक्षित डिलीवरी कर रचा इतिहास
दंत चिकित्सक की तैनाती से ग्रामीणों को राहत, 3 हजार से अधिक मरीजों को मिला उपचार
रायगढ़, 9 जनवरी 2026। राज्य शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप खनन प्रभावित एवं सुदूर वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। विकासखंड लैलूंगा इसका सशक्त उदाहरण बन रहा है, जहां डीएमएफ मद से की गई पहल ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती दी है।
डीएमएफ मद से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (एमसीएच) लैलूंगा में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. उपाध्याय की पदस्थापना के बाद क्षेत्र में संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव को ठोस आधार मिला है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक एमसीएच लैलूंगा में कुल 574 सुरक्षित प्रसव संपन्न कराए गए हैं। अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 की अवधि में 105 सिजेरियन एवं 469 सामान्य प्रसव कराए जाना इस बात का प्रमाण है कि विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं की उपलब्धता से गर्भवती महिलाओं का भरोसा शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार बढ़ा है। समय पर उपचार और निगरानी से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
इसी तरह डीएमएफ मद से दंत चिकित्सक की तैनाती ने भी ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र के नागरिकों को बड़ी राहत दी है। वर्ष 2025–26 में दंत विभाग में अब तक 3063 ओपीडी मरीजों का पंजीयन किया गया, जिनमें से 1095 मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। इससे दंत संबंधी समस्याओं के लिए लोगों को अब जिला मुख्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है और स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है।
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