रायगढ़। कापू थाना क्षेत्र में सामने आए सनसनीखेज हत्या के मामले का पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि सब्जी बनाने की बात को लेकर हुए विवाद में पति ने पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी। वारदात के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए शव को घर के आंगन में जला दिया और जली हुई हड्डियों के अवशेषों को जमीन में गड्ढा खोदकर पत्थर के नीचे दबा दिया। इसके बाद आरोपी थाने पहुंचा और पत्नी के लापता होने की झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन तथा एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के पर्यवेक्षण में कापू पुलिस ने संदेह, पूछताछ और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस पेचीदा मामले का खुलासा किया। बरामद हड्डियों के अवशेषों की डीएनए जांच में मृतका की पहचान 26 वर्षीय चमेली सिदार के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पति देवानंद सिदार के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
गुमशुदगी की रिपोर्ट से खुला हत्या का राज
पुलिस के अनुसार ग्राम कुमा निवासी 39 वर्षीय देवानंद सिदार ने 28 अप्रैल 2026 को थाना कापू पहुंचकर अपनी पत्नी चमेली सिदार के 16 अप्रैल की रात करीब 8 बजे घर से बिना बताए चले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तत्कालीन थाना प्रभारी उप निरीक्षक इगेश्वर यादव ने गुम इंसान कायम कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पति के बयान और उसके व्यवहार में पुलिस को कई विरोधाभास मिले। महिला के मायके पक्ष और अन्य लोगों से पूछताछ की गई तो संदेह और गहरा गया। पुलिस ने जब घटनाक्रम की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं तो सामने आया कि चमेली लापता नहीं हुई थी, बल्कि उसकी हत्या कर दी गई थी और घटना को गुमशुदगी का रूप देने की कोशिश की गई थी।
चार साल पहले हुआ था प्रेम विवाह
मृतका के पिता 65 वर्षीय बालसाय सिदार, निवासी मिर्जापुर (मक्कापुर), थाना पत्थलगांव, जिला जशपुर ने पुलिस को बताया कि चमेली उनकी सबसे छोटी बेटी थी। करीब चार वर्ष पहले प्रेम संबंध के चलते देवानंद उसे अपने साथ कुमा ले गया था और दोनों पति-पत्नी के रूप में रह रहे थे। दोनों की कोई संतान नहीं थी।
परिजनों के मुताबिक घटना के दो दिन बाद 18 अप्रैल को देवानंद उनके घर पहुंचा था और चमेली के वहां आने के बारे में पूछताछ की थी। परिवार ने जब बताया कि वह वहां नहीं आई है तो वह वापस लौट गया। बाद में 28 अप्रैल को एक दशकर्म कार्यक्रम के दौरान परिजनों को चमेली की हत्या और शव जलाए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद वे तत्काल कुमा पहुंचे और देवानंद से पूछताछ की।
“सब्जी नहीं बनाई” तो गुस्से में कर दी हत्या
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस और परिजनों के समक्ष बताया कि 16 अप्रैल की रात भाजी की सब्जी बनाने को लेकर उसका पत्नी चमेली से विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने पर उसने पत्नी का गला दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपी ने घटना छिपाने के लिए शव को घर के आंगन में जला दिया। इसके बाद जली हुई हड्डियों के अवशेषों को जमीन में गड्ढा खोदकर पत्थर के नीचे दबा दिया। वारदात को छिपाने के लिए उसने पत्नी के लापता होने की झूठी रिपोर्ट भी दर्ज करा दी।
DNA जांच ने कर दी पहचान की पुष्टि
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मर्ग क्रमांक 45/2026 के तहत जांच शुरू की गई। एसडीओपी धरमजयगढ़ के पर्यवेक्षण में तत्कालीन थाना प्रभारी कापू उप निरीक्षक इगेश्वर यादव ने विधिवत अनुमति लेकर एफएसएल अधिकारी की मौजूदगी में घटनास्थल से जली हुई हड्डियों के अवशेष बरामद किए।
अवशेषों का पंचनामा और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के बाद डॉक्टर द्वारा संरक्षित हड्डी के नमूने का डीएनए परीक्षण कराया गया। रिपोर्ट में हड्डियों के अवशेष गुम महिला चमेली सिदार के होने की पुष्टि हुई। वैज्ञानिक साक्ष्य मिलने के बाद 23 अगस्त 2026 को थाना कापू में अपराध क्रमांक 140/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और 238(ए) में मामला दर्ज किया गया।
तीन दिन गांव के बाहर कैंप कर आरोपी को पकड़ा
अपराध दर्ज होने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए थाना प्रभारी कापू निरीक्षक धर्माराम तिर्की के नेतृत्व में पुलिस टीम ने दबिश दी। पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपी फरार हो गया। इसके बाद पुलिस टीम ने लगातार तीन दिनों तक गांव के बाहर कैंप कर मुखबिर तंत्र को सक्रिय रखा।
लगातार प्रयास के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना स्वीकार किया। इसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
अंधे कत्ल का खुलासा करने में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी और एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी कापू निरीक्षक धर्माराम तिर्की, चौकी प्रभारी रैरूमाखुर्द उप निरीक्षक इगेश्वर यादव (तत्कालीन थाना प्रभारी कापू), प्रधान आरक्षक सोमेश गोस्वामी, प्रधान आरक्षक लक्ष्मी कैवर्त, आरक्षक विभूति सिंह, संजीव पटेल, विनय कुमार एक्का, दिलीप तिर्की एवं अमरदीप एक्का की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस की वैज्ञानिक जांच और लगातार निगरानी ने करीब चार महीने पुराने गुमशुदगी के मामले की परतें खोल दीं और आखिरकार हत्या के आरोपी पति तक पहुंचा दिया।
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