कोलता समाज ने सामूहिक रूप से मनाया पारंपरिक नवाखाई पर्व, सामाजिक एकता का दिया संदेश
लैलूंगा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं और सामाजिक संस्कृति से जुड़े पारंपरिक पर्व नवाखाई का उत्साह ग्राम होर्रोगुडा में देखने को मिला। यहां कोलता समाज के सामाजिक बंधुओं ने मिल-जुलकर सामूहिक नवाखाई समारोह का आयोजन किया। खास बात यह रही कि गांव में अलग-अलग परिवारों द्वारा नवाखाई मनाने की परंपरा को पीछे छोड़ते हुए इस बार समाज के लोगों ने एक साथ, सामूहिक रूप से नवाखाई मनाकर सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया।
नवाखाई केवल नई फसल के अन्न को ग्रहण करने का पर्व नहीं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि परंपरा और सामाजिक सद्भाव से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव है। नई फसल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए समाज के लोग इसे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाते हैं।



ग्राम होर्रोगुडा में आयोजित सामूहिक नवाखाई समारोह में समाज के विभिन्न परिवारों के सदस्य एक स्थान पर एकत्र हुए। सभी ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ नवाखाई पर्व मनाया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। सामूहिक आयोजन के कारण पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
परंपरा में बदलाव, एकता की ओर बढ़ा कदम
समाज के लोगों का मानना है कि पहले परिवार अपने-अपने स्तर पर नवाखाई मनाते थे, लेकिन सामूहिक आयोजन से समाज के सभी लोगों को एक साथ आने और आपसी मेल-जोल बढ़ाने का अवसर मिला। इसी उद्देश्य से अलग-अलग नवाखाई मनाने की परंपरा को हटाकर सामूहिक नवाखाई की नई पहल की गई।
इस आयोजन ने सामाजिक एकता के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति और पारंपरिक पर्वों से जोड़ने का भी संदेश दिया। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे सामूहिक आयोजन समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
ग्राम होर्रोगुडा की यह सामूहिक नवाखाई केवल एक पर्व का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता, परंपरा के संरक्षण और बदलते समय में सामूहिक संस्कृति को आगे बढ़ाने की सकारात्मक पहल के रूप में सामने आई।
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