रायगढ़। राजस्व व्यवस्था को आमजन के लिए सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में रायगढ़ जिला प्रशासन ने एक ऐसी पहल की है, जो आने वाले समय में ग्रामीण और शहरी—दोनों वर्गों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। कलेक्टोरेट परिसर में स्थापित ‘लैंड एटीएम’ मशीन ने अब जमीन से जुड़े दस्तावेज हासिल करने की पूरी प्रक्रिया को न केवल आसान बना दिया है, बल्कि इसे पूरी तरह नि:शुल्क भी कर दिया है।
अब तक जमीन के पुराने रिकॉर्ड या नकल पाने के लिए लोगों को रिकॉर्ड रूम के चक्कर काटने पड़ते थे। कई बार 70-80 साल पुराने दस्तावेज खोजने में दिनों लग जाते थे, और आम आदमी के लिए यह प्रक्रिया बेहद जटिल व थकाऊ होती थी। लेकिन अब इस नई व्यवस्था के बाद स्थिति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।
क्या-क्या प्रिंट करेगी ‘लैंड एटीएम’ मशीन?
यह मशीन केवल एक प्रिंटर नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड का डिजिटल गेटवे है। इसके माध्यम से नागरिक निम्न दस्तावेज आसानी से प्रिंट कर सकेंगे—
खसरा (Khasra) की नकल – जमीन के सर्वे और मालिकाना विवरण
बी-1 (B1) दस्तावेज – भू-अधिकार संबंधी आधिकारिक रिकॉर्ड
नक्शा (Map) – संबंधित भूमि का भू-नक्शा
मिसल रिकॉर्ड (पुराने राजस्व दस्तावेज) – कई दशक पुराने अभिलेख
नामांतरण (Mutation) की स्थिति और आदेश
राजस्व न्यायालय से जुड़े आदेश व रिकॉर्ड
जाति प्रमाण पत्र हेतु आवश्यक आधार रिकॉर्ड
यानी अब पटवारी या बाबू के भरोसे रहने की जरूरत नहीं—आम नागरिक खुद मशीन के जरिए अपनी जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल कर सकता है।
डिजिटाइजेशन से बदली तस्वीर
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की पहल पर करीब 35 लाख दस्तावेजों को डिजिटाइज किया गया है। रायपुर की पंकज इंटरप्राइजेस फर्म ने 22 युवाओं की टीम के साथ दो शिफ्टों में काम करते हुए इन दस्तावेजों को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया। यह काम न केवल समयबद्ध तरीके से पूरा हुआ, बल्कि रिकॉर्ड को ग्रामवार और क्षेत्रवार व्यवस्थित भी किया गया है।
रिकॉर्ड रूम की निर्भरता खत्म
राजस्व विभाग में रिकॉर्ड रूम को सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण स्थान माना जाता रहा है। एक दस्तावेज खोजने में घंटों, कभी-कभी दिनों का समय लग जाता था। इस नई प्रणाली ने उस पूरी निर्भरता को लगभग समाप्त कर दिया है। अब कोई भी व्यक्ति सीधे एप या मशीन के माध्यम से दस्तावेज खोजकर तुरंत प्रिंट निकाल सकता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में कदम
इस पहल का सबसे बड़ा असर पारदर्शिता पर पड़ेगा। जमीन से जुड़े मामलों में अक्सर देरी, गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं। ‘लैंड एटीएम’ जैसी व्यवस्था इन आशंकाओं को काफी हद तक खत्म कर सकती है, क्योंकि अब रिकॉर्ड सीधे जनता के हाथ में होगा।
ट्रायल शुरू, जल्द मिलेगा व्यापक लाभ
फिलहाल कलेक्टोरेट गेट पर लगी इस मशीन का ट्रायल शुरू हो चुका है। शुरुआती सफलता के बाद इसे जिले के अन्य प्रमुख स्थानों पर भी स्थापित किए जाने की योजना है, ताकि दूरदराज के ग्रामीणों को भी इसका लाभ मिल सके।
रायगढ़ का यह प्रयोग केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि प्रशासनिक सोच में आए बदलाव का संकेत है—जहां सुविधा, पारदर्शिता और आमजन की पहुंच को प्राथमिकता दी जा रही है। अगर यह मॉडल सफल रहा, तो आने वाले समय में यह पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन सकता है।
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