रायगढ़/धरमजयगढ़ वनमंडल में हाथियों की लगातार हो रही मौत अब चिंता का विषय बनती जा रही है। छाल रेंज के तरेकेला गांव के पास केराझरिया डेम क्षेत्र में एक 5 माह के हाथी शावक की दलदल में फंसने से दर्दनाक मौत हो गई। कुछ ही दिनों में दूसरी घटना सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, हाथियों का एक दल क्षेत्र में विचरण कर रहा था, तभी एक छोटा शावक दलदली क्षेत्र में फंस गया। हाथियों का दल काफी देर तक उसे निकालने की कोशिश करता रहा, लेकिन वह सफल नहीं हो सके और अंततः शावक की मौत हो गई।
यह घटना उस इलाके में हुई है जहां हाथियों की नियमित आवाजाही रहती है। इसके बावजूद खतरनाक दलदली क्षेत्रों की पहचान और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। वन विभाग की ओर से हाथी निगरानी और सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावे इस घटना के बाद खोखले नजर आ रहे हैं।
अगर समय रहते संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता और बचाव के उपाय किए जाते, तो संभवतः इस मासूम शावक की जान बचाई जा सकती थी।
⚠️ कुछ ही दिनों में दूसरी मौत
शुक्रवार को सिंघीझाप डेम में डूबने से एक और शावक की मौत
अब लगातार दूसरी घटना से ग्रामीणों में आक्रोश
वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
🗣️ ग्रामीणों की नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि नए DFO के कार्यभार संभालने के बाद से ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। आरोप है कि अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई और जांच तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर निगरानी कमजोर है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि वन्यजीव संरक्षण के नाम पर खर्च तो हो रहा है, लेकिन उसका प्रभाव जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा।
🐘 35 हाथियों का दल, गांवों में दहशत
क्षेत्र में अभी भी लगभग 35 हाथियों का दल मौजूद
आसपास के गांवों में डर और तनाव का माहौल
समय पर सूचना और सुरक्षा व्यवस्था की कमी
❓ बड़ा सवाल
धरमजयगढ़ वनमंडल में हाथियों की मौत का सिलसिला आखिर कब रुकेगा?
क्या हर घटना के बाद सिर्फ जांच और बयानबाजी होती रहेगी, या वन विभाग जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाएगा?
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