रायगढ़/लैलूंगा, 1 जुलाई। छत्तीसगढ़ की राजनीति में बुधवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व राष्ट्रीय मंत्री रवि भगत ने पार्टी से अपना इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने केवल अपने संगठनात्मक दायित्वों से ही नहीं, बल्कि भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से भी त्याग पत्र देकर पार्टी से अलग होने का फैसला लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रवि भगत ने अपना इस्तीफा पार्टी संगठन के मंडल अध्यक्ष को भेजा है। इसके साथ ही उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी त्याग पत्र साझा कर इसे सार्वजनिक कर दिया। इस्तीफा सार्वजनिक होते ही राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
अपने त्याग पत्र में रवि भगत ने भाजपा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए लिखा है कि पार्टी ने उन्हें एक छोटे गांव के कार्यकर्ता से पहचान और सम्मान दिलाने का अवसर दिया, जिसके लिए वे सदैव आभारी रहेंगे। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे का विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया और इसे निजी कारणों से लिया गया निर्णय बताया।
रवि भगत लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने प्रदेशभर में संगठन विस्तार, युवाओं की भागीदारी और राजनीतिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वे भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं, जिसके चलते संगठन में उनकी एक अलग पहचान रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाल के समय में रवि भगत पार्टी की कुछ नीतियों और नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक रूप से असहमति जताते दिखाई दे रहे थे। विभिन्न मुद्दों पर उनके बयानों ने पहले भी राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया था। ऐसे में उनके अचानक लिए गए इस फैसले को केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि संगठन के भीतर चल रहे संभावित मतभेदों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
हालांकि भाजपा की ओर से इस इस्तीफे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व इस घटनाक्रम को गंभीरता से ले सकता है। वहीं समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि आने वाले समय में रवि भगत की राजनीतिक दिशा क्या होगी और क्या वे किसी नई भूमिका या मंच के साथ नजर आएंगे।
फिलहाल रवि भगत के इस्तीफे ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम का राजनीतिक प्रभाव किस रूप में सामने आएगा, इस पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।
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