लैलूंगा/रायगढ़। वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहे केशला-तोलगे मार्ग को लेकर शनिवार का दिन क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। लगभग दो दशक से सड़क निर्माण और मरम्मत की मांग कर रहे ग्रामीणों ने जब केशला मोड़ (कुंजारा) में सड़क संघर्ष समिति के नेतृत्व में चक्का जाम किया तो प्रशासन को मौके पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से चर्चा करनी पड़ी। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने ग्रामीणों को 15 अगस्त तक सड़क की मरम्मत कर उसे आवागमन योग्य बनाने का आश्वासन दिया। इसके बाद संघर्ष समिति ने जनहित को ध्यान में रखते हुए फिलहाल चक्का जाम समाप्त करने की घोषणा कर दी। हालांकि ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय सीमा तक काम शुरू नहीं हुआ या अधूरा रहा तो आंदोलन पहले से अधिक व्यापक और उग्र रूप में दोबारा किया जाएगा।
केशला-तोलगे मार्ग लंबे समय से क्षेत्र की सबसे गंभीर समस्याओं में गिना जाता है। यह सड़क कई गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ती है और रोजाना सैकड़ों लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। लेकिन वर्षों से मरम्मत और रखरखाव के अभाव में सड़क जगह-जगह गहरे गड्ढों में बदल चुकी है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी विकट हो जाती है। सड़क पर पानी भर जाने से गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। कई बार दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हुए हैं, जबकि चारपहिया वाहनों को भी इस मार्ग से गुजरने में भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। किसान अपनी उपज समय पर बाजार तक नहीं पहुंचा पाते, स्कूली बच्चों को रोजाना जोखिम उठाकर स्कूल जाना पड़ता है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार एंबुलेंस को भी इस मार्ग पर आने-जाने में परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली के कारण पूरा क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटता जा रहा है।
क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले लगभग 20 वर्षों से सड़क निर्माण और मरम्मत की मांग लगातार उठाई जाती रही है। जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक अनेक बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। समय बीतता गया और सड़क की हालत लगातार खराब होती चली गई। जब बार-बार की मांगों का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, तब ग्रामीणों ने सड़क संघर्ष समिति का गठन कर आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।
शनिवार को केशला मोड़ (कुंजारा) में आयोजित चक्का जाम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा, किसान, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन लोगों का आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क पर काम होते देखना चाहते हैं। उनका कहना था कि यदि वर्षों पहले सड़क की मरम्मत समय पर कर दी जाती तो आज आंदोलन की नौबत नहीं आती।
आंदोलन की सूचना मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सड़क संघर्ष समिति के पदाधिकारियों तथा ग्रामीणों के साथ विस्तृत चर्चा की। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने स्वीकार किया कि सड़क की स्थिति गंभीर है और तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया कि 15 अगस्त तक सड़क की आवश्यक मरम्मत कर उसे आवागमन योग्य बनाया जाएगा। साथ ही अधिकारियों ने यह भी कहा कि मार्ग के स्थायी निर्माण और उन्नयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी ताकि भविष्य में लोगों को बार-बार इस समस्या का सामना न करना पड़े।
विभाग के आश्वासन के बाद सड़क संघर्ष समिति ने आपसी सहमति से फिलहाल चक्का जाम समाप्त करने की घोषणा की। समिति के सदस्यों ने कहा कि उनका उद्देश्य आम जनता को परेशानी देना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित सड़क समस्या का समाधान कराना है। यदि प्रशासन ने समय पर कार्रवाई की तो यह पूरे क्षेत्र के लिए राहत की बात होगी।
हालांकि संघर्ष समिति ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी भी दी। आंदोलनकारियों ने कहा कि 15 अगस्त केवल एक तारीख नहीं, बल्कि प्रशासन के वादे की परीक्षा होगी। यदि तय समय सीमा तक सड़क मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ या अधूरा छोड़ दिया गया तो क्षेत्र की जनता पहले से कहीं अधिक बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी। आवश्यकता पड़ने पर पुनः चक्का जाम, धरना-प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक आंदोलन किए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह आंदोलन केवल एक सड़क के लिए नहीं था, बल्कि क्षेत्र के विकास, सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई भी है। उनका कहना है कि अच्छी सड़क किसी भी क्षेत्र के विकास की आधारशिला होती है। सड़क बेहतर होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, कृषि और रोजगार जैसी सभी गतिविधियों को गति मिलती है। इसलिए अब क्षेत्रवासी चाहते हैं कि केवल अस्थायी मरम्मत ही नहीं, बल्कि इस मार्ग का स्थायी और गुणवत्तापूर्ण निर्माण भी जल्द से जल्द कराया जाए।
शनिवार का आंदोलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन लोगों की निगाहें अब 15 अगस्त पर टिक गई हैं। पूरे क्षेत्र में यही चर्चा है कि क्या इस बार लोक निर्माण विभाग अपना वादा निभाकर वर्षों पुरानी समस्या का समाधान करेगा, या फिर यह आश्वासन भी पहले की तरह कागजों तक सीमित रह जाएगा। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि केशला-तोलगे मार्ग पर विकास की नई शुरुआत होगी या फिर ग्रामीणों को अपने अधिकारों के लिए एक बार फिर सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
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