रायगढ़, 25 मई 2026। धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल परिक्षेत्र स्थित आमामुड़ा तालाब में हाथी शावक की मौत की घटना के बाद वन विभाग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करना शुरू कर दिया है। विभाग अब हाथियों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को मजबूत करने के उद्देश्य से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
वन विभाग द्वारा हाथियों के नियमित विचरण वाले क्षेत्रों, तालाबों और जल स्रोतों का चिन्हांकन कर लगातार निगरानी की जा रही है। विशेष रूप से ऐसे जलाशयों की पहचान की जा रही है, जहां छोटे हाथी शावकों के फंसने या दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। आवश्यकता अनुसार इन स्थानों पर सुरक्षित ढलान, पहुंच मार्ग और अन्य सुरक्षा उपाय विकसित किए जाएंगे, ताकि हाथियों को जल स्रोतों तक सुरक्षित पहुंच मिल सके।
वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि आमामुड़ा तालाब में हाथी शावक की मृत्यु की घटना बेहद संवेदनशील और दुखद है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी और पूरी रात हालात की निगरानी की गई। वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की गई।
उन्होंने बताया कि शावक की मौत के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए सैंपल राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को भेजे गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विभाग विशेष रणनीति पर काम कर रहा है।
वन विभाग अब हाथियों के विचरण वाले संवेदनशील क्षेत्रों और जल स्रोतों का तकनीकी परीक्षण भी कराएगा। ऐसे तालाबों और जलाशयों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां हाथी शावकों के फंसने या दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका अधिक रहती है। जरूरत के अनुसार वहां सुरक्षित ढलान और पहुंच मार्ग विकसित किए जाएंगे।
रात्रिकालीन गश्त व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। हाथी मित्र दल, ट्रैकर और वन अमले की संयुक्त टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरा, ड्रोन और थर्मल ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है, ताकि किसी भी असामान्य गतिविधि की समय पर जानकारी मिल सके और तुरंत कार्रवाई की जा सके।
घटना के बाद वन विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ समन्वय बढ़ाते हुए वैज्ञानिक अध्ययन और निगरानी प्रणाली को भी मजबूत करने की पहल की है। विभाग हाथियों के व्यवहार, विचरण मार्ग और संवेदनशील स्थलों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति तैयार कर रहा है।
वनमंडलाधिकारी श्री उपाध्याय ने कहा कि वन विभाग हाथियों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर दीर्घकालिक संरक्षण योजना पर कार्य कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखें और किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल वन अमले को दें, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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