डीईओ ने खुद पढ़ाई अंग्रेजी व्याकरण, मोबाइल इस्तेमाल पर सख्त रोक; बोर्ड परीक्षा की तैयारी अभी से शुरू करने के निर्देश
रायगढ़, 11 जुलाई 2026। जिले में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ शैक्षणिक व्यवस्था को अनुशासित, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी श्यामानंद साहू एवं जिला मिशन समन्वयक आलोक स्वर्णकार ने रायगढ़, तमनार और घरघोड़ा विकासखंड के 10 शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों के अधिगम स्तर, स्वच्छता, अभिलेख संधारण और निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा की गई।
निरीक्षण में जहां बेहतर कार्य करने वाले विद्यालयों की सराहना की गई, वहीं गंभीर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों एवं शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शासकीय माध्यमिक शाला बंगुरसिया में पाठ्यपुस्तक वितरण, डेली डायरी और शैक्षणिक अभिलेखों में गंभीर कमियां मिलने पर प्रधान पाठक को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। वहीं निरीक्षण के दौरान संबंधित सीएसी भूपेश पांडा के अनुपस्थित मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए जवाबदेही तय करने को कहा।
प्राथमिक शाला बंगुरसिया में जिला शिक्षा अधिकारी ने बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी शैक्षणिक क्षमता का परीक्षण किया। कक्षा तीसरी के छात्र विपुल गुप्ता ने 20 तक के पहाड़े धाराप्रवाह सुनाकर सभी का ध्यान आकर्षित किया। अधिकारियों ने छात्र की प्रशंसा करते हुए अन्य विद्यार्थियों को भी नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास के साथ अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महलोई में प्रत्येक कक्षा का निरीक्षण करने के साथ निर्माणाधीन नए भवन की प्रगति का भी जायजा लिया गया। संबंधित ठेकेदार को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। शिक्षकों की बैठक लेकर ब्लूप्रिंट आधारित शिक्षण, बोर्ड परीक्षा की तैयारी और प्रभावी स्कूल डेवलपमेंट प्लान तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवगढ़ में निरीक्षण के दौरान कुछ शिक्षक कक्षा में पढ़ाने के बजाय स्टाफ रूम में बैठे मिले। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्यालय समय में प्रत्येक शिक्षक का स्थान विद्यार्थियों के बीच कक्षा में होना चाहिए।
पीएम श्री विद्यालय तमनार एवं घरघोड़ा में शैक्षणिक गतिविधियों, अनुशासन और स्वच्छता का निरीक्षण किया गया। प्राचार्यों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नियमित प्रार्थना सभा, साउंड सिस्टम के माध्यम से सुव्यवस्थित संचालन तथा सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के निर्देश दिए गए ताकि विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों का विकास हो सके।
निरीक्षण का सबसे प्रेरक दृश्य शासकीय हाई स्कूल भालूमार में देखने को मिला, जहां जिला शिक्षा अधिकारी श्यामानंद साहू ने स्वयं चॉक उठाकर विद्यार्थियों को अंग्रेजी व्याकरण पढ़ाया। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, नियमित अध्ययन करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
निरीक्षण के दौरान सभी शिक्षकों को प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता पर व्यक्तिगत ध्यान देने, विषयवार रणनीति बनाकर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी शुरू करने, ब्लूप्रिंट आधारित शिक्षण अपनाने तथा स्कूल डेवलपमेंट प्लान का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी स्पष्ट हिदायत दी गई कि कक्षा में अध्यापन के दौरान कोई भी शिक्षक मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करेगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं बल्कि भविष्य निर्माण की प्रयोगशाला हैं। शिक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक शिक्षक का प्रथम दायित्व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासित वातावरण और प्रत्येक विद्यार्थी तक बेहतर सीखने के अवसर पहुंचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम के लिए अभी से ठोस कार्ययोजना बनानी होगी तथा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निरीक्षण और अकादमिक सहयोग की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।
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