राजपुर की जर्जर सड़क पर फूटा जनाक्रोश: टायर जलाकर किया चक्का जाम, PWD के लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन
लैलूंगा (रायगढ़)। वर्षों से बदहाल पड़ी राजपुर सड़क को लेकर आखिरकार ग्रामीणों का सब्र टूट गया। शनिवार सुबह लैलूंगा विकासखंड के राजपुर बाजार में सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए और चक्का जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) के खिलाफ नारेबाजी की तथा तत्काल सड़क मरम्मत की मांग उठाई। करीब तीन घंटे तक चले इस आंदोलन के कारण मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा।

आंदोलन का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता रवि भगत ने किया। उन्होंने कहा कि राजपुर मार्ग लंबे समय से गड्ढों, कीचड़ और उखड़ी हुई डामर सड़क के कारण लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। कई बार अधिकारियों को आवेदन, ज्ञापन और मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही सड़क की स्थिति और भयावह हो जाती है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को सड़क का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में एंबुलेंस को भारी दिक्कत होती है, जबकि स्कूली बच्चों, किसानों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को रोजाना जोखिम उठाकर सफर करना पड़ता है। कई दोपहिया वाहन चालक फिसलकर घायल भी हो चुके हैं।
चक्का जाम की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से विस्तृत चर्चा की और सड़क मरम्मत कार्य छह दिनों के भीतर शुरू करने का लिखित आश्वासन दिया। अधिकारियों ने बताया कि सड़क मरम्मत का प्रस्ताव पहले ही स्वीकृत हो चुका है, लेकिन लगातार बारिश के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका। अब आवश्यक सामग्री और मशीनें उपलब्ध हैं तथा निर्धारित समय सीमा के भीतर मरम्मत कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
लिखित गारंटी मिलने के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर चक्का जाम खोल दिया, जिससे मार्ग पर यातायात फिर से सामान्य हो गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि विभाग अपने वादे पर खरा नहीं उतरा और तय समय में मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ, तो इससे भी बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल सड़क की मांग नहीं, बल्कि क्षेत्र के हजारों लोगों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा मुद्दा है। उनका कहना है कि विकास के दावों के बीच यदि ग्रामीणों को आज भी जर्जर सड़कों पर चलने को मजबूर होना पड़े, तो यह चिंता का विषय है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें PWD के उस लिखित आश्वासन पर टिकी हैं, जिससे लोगों को वर्षों बाद सड़क सुधरने की उम्मीद जगी है।
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