रायगढ़, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह के मंच पर सुप्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास की ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण काव्य-पाठ ने समा बाँध दिया। उनकी कविताओं और गीतों ने दर्शकों को हँसी, भावुकता और विचारों की गहराई से भर दिया।
डॉ. कुमार विश्वास ने जब अपनी लोकप्रिय पंक्तियाँ “तुझी से शाम हो जाना, तुझी से भोर हो जाना…” सुनाईं तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। उन्होंने अपने काव्य पाठ में “मिले हर ज़ख्म को मुस्कान से सीना नहीं आया, अमरता चाहते थे पर ज़हर पीना नहीं आया…” जैसी मार्मिक रचनाएँ भी प्रस्तुत कीं। इन पंक्तियों ने श्रोताओं को जीवन की विडंबनाओं और मानवीय संवेदनाओं की सजीव अनुभूति कराई। इसके साथ ही उनकी प्रसिद्ध रचना “कोई दीवाना कहता है, कोई पागल कहता है…” पर श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक तालियाँ बजाईं। उनके व्यंग्य, शेरो-शायरी और सहज शैली ने कार्यक्रम को और भी रोचक और अविस्मरणीय बना दिया। समारोह में मौजूद दर्शकों ने तालियों की गूँज से अपने प्रिय कवि का स्वागत किया। डॉ. कुमार विश्वास की प्रस्तुतियों ने न केवल मंच की शोभा बढ़ाई बल्कि श्रोताओं के दिलों में साहित्य और कविता के प्रति गहरी छाप भी छोड़ी।
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